फसल बीमा योजना के लिए बजट आवंटन पांच वर्ष पूर्व 13 जनवरी 2016 को केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मंजूरी दी थी। तब से लेकर अभी तक योजना में कई सुधार किये गए है, सुधारों के साथ यह योजना लगभग सम्पूर्ण देश (कुछ राज्यों को छोड़कर) में लागू है |  पहले प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी ऋणी किसानों का बीमा हो जाता था परन्तु अब इसे स्वेच्छिक बना दिया गया है | इस वर्ष रबी सीजन में 5.5 करोड़ से अधिक किसानों ने इस योजना के तहत आवेदन किया है जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में योजना के बजट में वृद्धि की गई है |  योजना के तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं फसल बीमा कंपनियों के द्वारा मिलकर किसानों को फसल नुकसान की भरपाई की जाती है | किसानों के लिए देश भर में सबसे कम और एक समान प्रीमियम की व्यवस्था की गई है जिसमें फसलों के बुवाई चक्र के पूर्व से लेकर फसल की कटाई के बाद तक के लिए सुरक्षा प्रदान करती है, जिसमें सुरक्षित की गई बुवाई और फसल सत्र के मध्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के लिए सुरक्षा भी प्रदान करना शामिल है।

fasal bima yojana 21-22

फसल बीमा योजना के तहत 16000 करोड़ रुपये का आवंटन देश भर में किसानों की फसलों की सुरक्षा को बढ़ावा देने और किसानों तक फसल बीमा का अधिक से अधिक लाभ पहुँचाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के लिए 16000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के लिये लगभग 305 करोड़ रुपये की बजटीय वृद्धि है | प्रधनमंत्री फसल बीमा योजना में नुकसान के दावों का भुगतान फसल बीमा योजना में किसान को फसल बीमा ऐप, कृषक कल्याण केंद्र- सीएससी केंद्र या निकटतम कृषि अधिकारी के माध्यम से किसी भी घटना के होने के 72 घंटों के भीतर हुए फसल के नुकसान की सुचना दे सकते हैं | इसके बाद  नुकसान के दावा का लाभ पात्र किसान के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रदान किया जाता है।  पीएमएफबीवाई पोर्टल के साथ भूमि रिकॉर्ड का संयोजन, किसानों के नामांकन को आसान बनाने के लिये फसल बीमा मोबाइल-ऐप का उपयोग और उपग्रह इमेजरी, रिमोट-सेंसिंग तकनीक, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक से फसल नुकसान का आकलन करने के लिए योजना की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं। इस समय  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नामांकित कुल किसानों में से 84% छोटे और सीमांत किसान हैं। वर्ष 2020 में इसके सुधार के बाद किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाया गया है |