पशुओं में टीकाकरण

जिस प्रकार सम्पूर्ण मानव जाती कोविद-१९ नामक विषाणु उत्पन महामारी से आतंकित हैं और लाखों मनुष्य काल के ग्रास हो चुके हैं। मेडिकल साइंस इसके वैक्सीन का परिक्षण करने में जुटे हैं। अर्थात आप समझ सकतें हैं की विषाणु जनित रोगों से निपटने का केवल एक मात्र उपाय व्यक्तिगत स्वच्छता एवं टीकाकरण है। पशुधन हमारे जीवन का अभिन्य अंग है यह, आर्थिक, सामाजिक और हमारे पर्यावरण के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। दुर्भाग्य की बात यह है की हम पशुधन को सिर्फ आर्थिक दृश्टिकोण को ही ध्यान में रख कर उसकी स्वास्थ की चिंता करतें है। इन पशुधन को बीमारी से बचाकर हम सामाजिक की कामना करतें हैँ।

पशुधन को खुरपका-मुँहपका, गलाघोंटु, लंगड़ा बुखार और संक्रामक गर्भपात (बु्रसेल्लोसिस) जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक है कि पशुओं को नियमित रूप से टीके लगवाना चाहिए। टीकाकरण से पूर्व पशु को ब्रॉड स्पेक्ट्रम कीड़ानाशी से डीवॉर्मिंग आवस्य करबायें इससे टिके का प्रभाव अच्छा होता है। 

पशुओं का टीकाकरण

क्र. टीका का नाम (बीमारी ) पहला डोज दूसरा डोज बाद में
1 रक्षा-ओवैक (खुरपका-मुँहपका) चार माह की उम्र में नौ माह के बाद प्रत्येक वर्ष
2 रक्षा-एचएस (गलाघोंटू) छः माह ……………….. प्रत्येक वर्ष
3. रक्षा-बीक्यू (लंगड़ा बुखार) छः माह ……………….. ………………..
एक से अधिक बीमारियों के संयुक्त टीके
4 रक्षा-एचएस़बीक्यू (गलाघोंटू व लंगडा बुखार) छः माह की उम्र में ……………….. प्रत्येक वर्ष
5 रक्षा- बायोवैक (मुँहपका-खुरपका का एवं गलाघोंटू का संयुक्त टीका) चार माह की उम्र में नौ माह के बाद प्रत्येक वर्ष
6 रक्षा ट्रायो वैब (मुँहपका-खुरपका गलाघोंटू एवं लंगड़ा बुखार का संयुक्त टीका) चार माह की उम्र में ……………….. प्रत्येक वर्ष
7 संक्रामक गर्भपात (ब्रुसेल्लोसिस) 4-8 महीने की उम्र के केवल बाछियों को (जीवन में एक बार) प्रत्येक वर्ष

राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक गाँँव मेें समय-समय पर विभिन्न निःशुुल्क टीकाकरण अभियान चलाये जातें हैं। जिसकी जानकारी निकटवर्ती पशु चिकित्सालय/संबंधित जिला पशुपालन कार्यालय अथवा पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना से प्राप्त की जा सकती है।